“SIR ने और कितनी जान लेनी है?” — Bengal में BLO की मौत से हड़कंप

अजमल शाह
अजमल शाह

पश्चिम बंगाल इस समय Special Intensive Revision (SIR) के कारण सुर्खियों में है। और अब नदिया ज़िले से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे प्रशासन को झकझोर दिया है। एक महिला बूथ लेवल ऑफ़िसर (BLO) — रिंकू तरफ़दार — ने आत्महत्या कर ली।
परिवार का आरोप है कि SIR का भारी दबाव, काम का बोझ, और डिजिटल प्रक्रियाओं की जटिलता ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया।

सुसाइड नोट में लिखा — “95% काम किया, पर Online Process नहीं आता”

पुलिस के मुताबिक, उनके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है। नोट में रिंकू ने लिखा- “95% offline काम पूरा कर लिया था। “Online upload कैसे करें, कोई नहीं बता रहा। “Supervisor को बताया, पर मदद नहीं मिली। “मेरी मौत के लिए Election Commission ज़िम्मेदार है।

यानी ground-level staff को digital system में धकेल तो दिया गया, पर training? “वो किसी और department की ज़िम्मेदारी है”—शायद यही attitude कहीं भारी पड़ गया।

परिवार का आरोप: “ये आत्महत्या नहीं, सिस्टम की हत्या है”

रिंकू के पति असीम तरफ़दार ने कहा- “मेरी पत्नी ने गांव-गांव जाकर offline forms दिए। “सब वापस भी ले आईं। “लेकिन डिजिटल process की कोई training नहीं थी। “ये आत्महत्या नहीं, आयोग की हत्या है।”

उनकी बातों से साफ है—SIR का pressure सिर्फ paperwork नहीं, mental burden भी बन रहा है।

एक नहीं, कई मौतें — Bengal में SIR बना नया डर का नाम?

यह पहली घटना नहीं है। बर्दवान (Memaari): बीएलओ नमिता हांसदा की brain stroke से मौत — परिवार ने काम के दबाव को दोषी ठहराया। जलपाईगुड़ी: शांति मुनि ओरांव का शव बरामद — फिर वही आरोप। हुगली: एक महिला BLO brain stroke के बाद अस्पताल में गंभीर स्थिति में।

ऐसा लग रहा है कि SIR का workload elections से ज़्यादा “life-threatening deadline” बन गया है।

ममता बनर्जी का सवाल: “SIR और कितनी जान लेगा?”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने X पर लिखा- “एसआईआर और कितने लोगों की जान लेगा?”

उन्होंने कुछ दिन पहले ही चुनाव आयोग को पत्र लिखकर SIR को- अव्यावहारिक, मानव-शक्ति-नाशक,और ground reality से कटे हुए नियम बताकर इसे तुरंत बंद करने का अनुरोध किया था।

राजनीतिक हलचल अब तेज हो चुकी है।

SIR विवाद: काम का दबाव या सिस्टम की कमी?

सरकारी जानकारी कहती है:
“SIR प्रक्रिया जरूरी है।”

Ground-level BLO कह रहे हैं:
“हम इंसान हैं, machine नहीं।”

Gap साफ है— Training कम, workload ज़्यादा, और deadline तो ऐसी जैसे “कल ही पूरा कराओ, वरना दुनिया खत्म।”

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